‘विकास’ का वास्तु वक्री होगा,
अय्यार अपना धर्म निभाएंगे
काली कमाई की रंगदारी में,
दुर्योधन सुयोधन हो जाएंगे
लूट की छूट यूं मिलेगी,
यक्ष प्रश्न ना कर पाएंगे
खाने-खिलाने की होड़ मचेगी,
विजय रथ अब शकुनि चलाएंगे
नगर नियोजन में भ्रष्ट योजन होगा,
पांडव लाक्षागृह में ही मारे जाएंगे
‘ऋषि-आयुष’ नालों में दम तोड़ेंगे,
जीव हत्या के पाप धोने गंगा कहां लाएंगे
द्यूत क्रीड़ा में मग्न युधिष्ठिर,
भीष्म प्रतिज्ञा ना ले पाएंगे
गांधारी, दुर्योधन जंघा को वज्र करेगी,
गदाधारी भीम कहां कुछ कर पाएंगे
एकलव्य सब शातिर होंगे,
गुरु द्रोण को घंटाल बताएंगे
संजय दृष्टि वाले गूंगे होंगे,
फिर धृतराष्ट्र कहां सुन पाएंगे
हे द्रौपदी! कृष्ण अब नहीं आएंगे,
क्या न्याय के लिए हम कंस को बुलाएंगे
द्वापर की लीला अब ना होगी,
कलियुग में शहर शापित हो जाएंगे
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